Inspirational Quotes by Amrita Pritam! Famous Quotes

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Inspirational Quotes by Amrita Pritam

अमृता प्रीतम का जन्म पाकिस्तान के गुजरांवाला में 31 अगस्त 1919 को हुआ था। निधन 31 अक्टूबर 2005 को हुआ।


👩‍🦰झूट के रास्ते पर बेहद फिसलन है
जाने किस समय किस अहसास का पैर फिसल जाये🎅

 

Amrita Pritam

 


👧मैं दिलके एक कोने में बैठी हूँ
तुम्हारी याद इस तरह आयी
जैसे गीली लकड़ी मे से
गहरा और काला धुवा उठता है👮‍♂️

 

Amrita Pritam Quotes

 


👲रब बक्शे, न बक्शे
उसदी रजा
असी यार नू
सजदा कर बैठ।🧔

👩‍🔬मेरी रात जग रहीहै
तेरा ख्याल सो गया।🕵️‍♀️

💃सपने- जैसे कोई भट्टियां है
हर भट्टी में आग झोंकता हुवा
मेरा इश्क मजदूरी करता है।
तेरा मिलना ऐसा होता है
जैसे कोई हथेली पर
एक वक्त की रोज़ी रखदे।🧛‍♂️️

👩पैर खोलो तो धरती अपनी है
पंख खोलो तो आसमान….

👧परछाईंयोंको पकड़ने वालो
छाती में जलती हुवी आग की
परछायी नहीं होती।👶

💦कुछ ख्वाहिशे बारिश की
उन बूंदो की तरह होतीहै
जिन्हे पानेकी चाहतमे
हटेलियाँ तो भीग जाती है।
मगर हाथ हमेशा खली रहते है……

🔴दीवाने पैन के अंतिम शिखर पर
पैर रखकर खड़ा नहीं रहा जा सकता
पैरों पर बैठने के लिए
धर्तिका टुकड़ा चाहिए…💥

💚एक हद मुल्क की,
और नाप कर देखो
एक हद इल्म की
एक हद इश्क की
और फिर बताना
किसी हद कहा है…💙

💓कभी कभी मौत भी
जब एक किताब लिखती है
तो जिंदगीसे
एक भूमिका लिखवाने के लिए जाती है।💙

💛इश्क फले तो फले ऐसा
सदियों तक फलता जाये
इश्क जले तो जले ऐसा
जिंदगी के बाद भी जिंदगियां महकाएं।💜

जहाँ भी आज़ाद रूह की झलक पड़े
समझना वह मेरा घर है।

देह कभी दुल्हन नहीं बनती
रूह कभी विधवा नहीं होती।

मैंने ख़ामोशी को लफ्ज दिए
तुमने लफ्जों को ही खामोश कर दिया।

तुम्हारा नाम छाला बन गया है जीभ पर
दुखता है जभ भी कुछ कहती हूँ।

Amrita Pritam Quotes in English


In the blink of an eye everything can change.
So forgive often and love with all your heart
You may never know when you may not have
that chance again.

“Many stories are not written on Paper,
But they are written on the bodies and minds of women.”

“When a man denies the power of women,
he is denying his own subconscious”.

धरती का दिल धड़क रहा है
सुना है आज टहनियों के घर
फूल मेहमान हुए हैं
तेरा मिलना ऐसे होता है
जैसे कोई हथेली पर
एक वक़्त की रोजी रख दे—अमृता प्रीतम

जहाँ भी
आज़ाद रूह की झलक पड़े
समझना वह मेरा घर हैअब सूरज रोज वक़्त पर डूब जाता है
और अँधेरा रोज़ मेरी छाती में उतर आता है.- अमृता प्रीतम

वह देख! परे सामने उधर
सच और झूठ के बीच
कुछ ख़ाली जगह हैतड़प किसे कहते हैं,
तू यह नहीं जानती
किसी पर कोई अपनी
ज़िन्दगी क्यों निसार करता है-अमृता प्रीतम

मैं उस वक़्त का फल हूँ
जब आज़ादी के पेड़ पर
बौर पड़ रहा थातू अपना बदन भी उतार दे
उधर मूढ़े पर रख दे, कोई खास बात नहीं
बस अपने अपने देश का रिवाज़ है —अमृता प्रीतम

आँखों में कंकड़ छितरा गए
और नज़र जख़्मी हो गई
कुछ दिखाई नहीं देता
दुनिया शायद अब भी बसती हैपर यादों के धागे
कायनात के लम्हे की तरह होते हैं——अमृता प्रीतम

उसने तो इश्क की कानी खा ली थी
और एक दरवेश की मानिंद उसने
मेरे श्वाशों कि धुनी राम ली थीतुम्हारी याद इस तरह आयी
जैसे गीली लकड़ी में से
गहरा और काला धूंआ उठता है

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